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बंद करने के बजाय शिफ्ट भी कराया जा सकता था पेट्रोल पंप नगर निगम मुख्यालय के आसपास कई जमीनें अब भी खाली पड़ी हैं। यदि आबादी और सुरक्षा का कोई मामला हो तो पेट्रोल पंप को नगर निगम मुख्यालय के पास से कहीं और भी शिफ्ट कराया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सोनिया, विजयानगरम मार्केट, मालगोदाम कैंट के पास से हाल ही में नगर निगम ने अपनी जमीनों को कब्जा मुक्त कराया है। यदि चाहें तो यहां भी नया पेट्रोल पंप खोलकर आर्थिक क्षति को बचा सकते हैं।

दरअसल बड़े पैमाने पर डीजल और पेट्रोल लेने वालों को तेल कंपनियां एक से दो रुपये प्रति लीटर छूट देती हैं। निगम में हर महीने 40 से 45 हजार लीटर डीजल-पेट्रोल की खपत होती है। इस हिसाब से हर महीने 90 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। नगर निगम मुख्यालय के पास पेट्रोल पंप होने से हर गाड़ी में कितना तेल डाला जा रहा है। इसकी आसानी से निगरानी होती थी।

दरअसल बड़े पैमाने पर डीजल और पेट्रोल लेने वालों को तेल कंपनियां एक से दो रुपये प्रति लीटर छूट देती हैं। निगम में हर महीने 40 से 45 हजार लीटर डीजल-पेट्रोल की खपत होती है। इस हिसाब से हर महीने 90 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। नगर निगम मुख्यालय के पास पेट्रोल पंप होने से हर गाड़ी में कितना तेल डाला जा रहा है। इसकी आसानी से निगरानी होती थी।एचपी पेट्रोलियम ने दो साल से अपने टैंकर रखे थे ताकि इसके जरिये निगम को तेल की आपूर्ति की जा सके, लेकिन नगर निगम ने उसे एनओसी नहीं दी। इस कारण से पेट्रोल पंप बंद हो गया। सदन में खजुरी के पार्षद मदन मोहन दुबे ने मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि इस लापरवाही के कारण हर महीने एक लाख रुपये का नुकसान कर रहे हैं। इस आर्थिक नुकसान का जिम्मेदार कौन है। उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। हर वार्ड में फाॅगिंग के नाम पर 15 से 20 लीटर तेल देते हैं। 100 वार्ड में 1500 से 2000 लीटर तेल फाॅगिंग के नाम पर खर्च हो रहा है।बंद करने के बजाय शिफ्ट भी कराया जा सकता था पेट्रोल पंप

नगर निगम मुख्यालय के आसपास कई जमीनें अब भी खाली पड़ी हैं। यदि आबादी और सुरक्षा का कोई मामला हो तो पेट्रोल पंप को नगर निगम मुख्यालय के पास से कहीं और भी शिफ्ट कराया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सोनिया, विजयानगरम मार्केट, मालगोदाम कैंट के पास से हाल ही में नगर निगम ने अपनी जमीनों को कब्जा मुक्त कराया है। यदि चाहें तो यहां भी नया पेट्रोल पंप खोलकर आर्थिक क्षति को बचा सकते हैंक्या बोले अधिकारी

आबादी और सुरक्षा कारणों से पेट्रोल पंप बंद किया गया है। पहले प्रति लीटर एक से दो रुपये की छूट मिलती थी। हर महीने 40 से 45 हजार लीटर डीजल पेट्रोल की खपत है। – एके सक्सेना, अधिशासी अभियंता, आलोक विभाग, नगर निगम।

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